हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया (Hyperprolactinemia) के बारे में समझने से पहले बहुत ज़रूरी है के प्रोलैक्टिन (Prolactine) के बारे में समझा जाये। प्रोलैक्टिन पिट्यूटरी ग्रंथि (pituitary gland) द्वारा उत्पादित एक हार्मोन है। यह स्तन विकास को उत्तेजित करता है और गर्भावस्था (pregnancy) के दौरान और प्रसव के बाद दूध उत्पादन को बढ़ावा देता है। प्रोलैक्टिन का स्तर नई माताओं और गर्भवती महिलाओं के लिए उच्च होता है।
प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System): प्रोलैक्टिन प्रतिरक्षा प्रणाली को भी प्रभावित करता है और व्यक्ति के शरीर की रक्षा क्षमता को सुधारने में मदद करता है.
मेटाबोलिज़्म (Metabolism): प्रोलैक्टिन का थोड़ा-बहुत प्रभाव आपके मेटाबोलिज़्म पर भी होता है, लेकिन इसका प्रमुख उपयोग महिलाओं में स्तनपान की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में होता है।
हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया एक एंडोक्राइन (हार्मोनल) रोग है जिसमें आपके शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन की मात्रा अधिक हो जाती है। प्रोलैक्टिन हार्मोन पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलता है, जो आपके मस्तिष्क के नीचे होता है, और यह महिलाओं में स्तनपान की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है और पुरुषों में प्रजनन प्रणाली को प्रभावित करता है। यह हार्मोन टेस्टोस्टेरोन उत्पादन को नियंत्रित करता है, जो पुरुषों के लिंग, शारीरिक विकास, और यौवनिक लक्षणों को नियंत्रित करता है।
हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया एक एंडोक्राइन (हार्मोनल) रोग है जिसमें आपके शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन की मात्रा अधिक हो जाती है। प्रोलैक्टिन हार्मोन पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलता है, जो आपके मस्तिष्क के नीचे होता है, और यह महिलाओं में स्तनपान की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया होने पर, प्रोलैक्टिन की अधिक मात्रा के कारण कई प्रकार के लक्षण हो सकते हैं।
यौन इच्छा में कमी (Lack of interest in sex) : हाइपरप्रोलैकिनेमिया के एक सामान्य लक्षण में से एक यह हो सकता है कि यौन इच्छा में कमी होती है, जिसके कारण व्यक्ति का यौन इच्छा कम हो जाता है।
कमजोर हड्डियां (Low Bone Mass): हाइपरप्रोलैकिनेमिया के बारे में चिंता की जाने वाली एक और समस्या है कमजोर हड्डियां, जिसे आमतौर पर ओस्टिओपोरोसिस कहा जाता है। यह एक स्थायी नुकसान का कारण हो सकता है और हड्डियों को कमजोर बना सकता है।
स्तन से दूध की निकलना (Galactorrhea): यदि आप गर्भवती नहीं हैं और स्तन से दूध की तरह का प्रवाह आता है, तो यह एक अन्य हाइपरप्रोलैकिनेमिया का संकेत हो सकता है। इसके बारे में चिकित्सक से परामर्श करना महत्वपूर्ण होता है।
Erectile Dysfunction (ED) – यौन कमजोरी: हाइपरप्रोलैकिनेमिया के कारण पुरुषों में यौन समस्याएँ हो सकती हैं, और इसमें यौन कमजोरी (erectile dysfunction) शामिल हो सकती है, जिसमें व्यक्ति यौन संबंध बनाने में मुश्किल महसूस कर सकता है।
Low levels of testosterone – कम टेस्टोस्टेरोन स्तर: हाइपरप्रोलैकिनेमिया के कारण पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी हो सकती है, जिसके कारण यौवनिक लक्षणों में कमी हो सकती है, जैसे कि शारीरिक विकास और स्त्री संग यौवनिक लक्षणों का कम हो जाना।
Enlarged breast tissue (gynecomastia) – वृद्धि हुआ स्तन ऊतक (गाइनेकोमास्टिया): हाइपरप्रोलैकिनेमिया के कारण पुरुषों में स्तनों के उभार में वृद्धि (gynecomastia) हो सकता है, जिसमें पुरुषों के स्तन बड़े और सूजे हो सकते हैं।
हाइपरप्रोलैकिनेमिया (hyperprolactinemia) का क्षेत्रफल पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले कम होता है, क्योंकि प्रोलैक्टिन मुख्य रूप से महिलाओं में स्तनपान के प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है। हालांकि, कुछ प्रकार के परिस्थितियों में पुरुषों में भी हाइपरप्रोलैकिनेमिया का खतरा बढ़ सकता है।
महिलाओं में हाइपरप्रोलैकिनेमिया का सबसे सामान्य कारण महिलाओं में स्तनपान की प्रक्रिया के साथ संबंधित होता है। प्रोलैक्टिन की मात्रा महिलाओं में गर्भावस्था, डिलीवरी, और स्तनपान के समय बढ़ सकती है, और यह बिना नियमित हो सकती है।गर्भावस्था और डिलीवरी के बाद: गर्भावस्था के दौरान और डिलीवरी के बाद, प्रोलैक्टिन की मात्रा महिलाओं में बढ़ सकती है, जिसके कारण हाइपरप्रोलैकिनेमिया हो सकता है।
स्तन समस्याएँ – कुछ स्तन समस्याएँ, जैसे कि गले में दर्द या स्तन के चोट के कारण, प्रोलैक्टिन की मात्रा में वृद्धि के खतरे को बढ़ा सकती हैं।
दोषित पिट्यूटरी ग्लैंड- पिट्यूटरी ग्लैंड की किसी बीमारी या क्षति के कारण, प्रोलैक्टिन की अत्यधिक निर्माण हो सकती है, जिससे हाइपरप्रोलैकिनेमिया हो सकता है।
दवाओं का उपयोग – कुछ दवाओं का उपयोग भी हाइपरप्रोलैकिनेमिया के खतरे को बढ़ा सकता है, जैसे कि ऐंटीप्साइकोटिक और ऐंटीडिप्रेसेंट दवाएँ। जो मानसिक विकारों के इलाज में प्रयुक्त होती हैं।
थायरॉइड समस्याएँ- कुछ थायरॉइड समस्याएँ भी हाइपरप्रोलैकिनेमिया का कारण बन सकती हैं, क्योंकि थायरॉइड और पिट्यूटरी ग्लैंड के बीच के संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसा भी नहीं है के यह दवाएं आप ले ही नहीं सकते लेकिन, कोशिश करें के अधिक समय तक किसी भी दवा का सेवन न करें। एक बार सेहत ख़राब होने पर उसको दोबारा न होने दें। व्यायाम करें और पौष्टिक आहार लें। एक ही बीमारी में बार बार पड़ने का अर्थ है के आप अपने शरीर का अच्छा ध्यान नहीं रखते, जिसके चलते ही आप हाइपरप्रोलैकिनेमिया जैसी बीमारी के जाल में फँस जाते हैं। सबसे अधिक ज़रूरी है के समस्या या जानकारी का अभाव हो तो अपने डॉक्टर की सलाह लें।
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